मराठी साहित्य, संस्कृती आणि लेखनाचे व्यासपीठ

मोहब्बत..

विनायक पन्त · · जे न देखे रवी...
लेखनविषय:
काव्यरस
मेरे बिना वो खुश है तो शिकायत कैसी,अब उसको खुश भी ना देख सकु तो मोहब्बत कैसी...

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In reply to by खेडूत

उनके सिर्फ आसपास होने के एहसास से बदन मे दौडने लागता है लाव्हा वो भी हमे देख मुस्कुराती है और बडे प्यार से बोलती है, "कसा आहेस भावा?", पैजारबुवा,

एकप्रवासी Wed, 02/17/2016 - 00:10
मोहब्बत हर चीज से महोब्बत करवाती है खिलते फुलोंसे, बहती हवावोंसे बाते करवाती है