मराठी साहित्य, संस्कृती आणि लेखनाचे व्यासपीठ

अगर

नेताजी बोराडे · · जे न देखे रवी...
अगर तुम साथ देते तो आशियाँ हम सजा देते, यूँ बिखरी सी ज़िन्दगी को हम जीने की वजह देते. समज़ ये हम को भी है की हमारे तुम नहीं लेकिन, समज़ दिल को भी होती तो, हमसफर गम नही होते. - नेता

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