हुकलेली संधी
लेखनविषय:
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माध्यान्हीची वेळ | जराशी निवांत | लाभतो एकांत | घरामध्ये ||
झाली सामसूम | आटोपता काम | करिती आराम | सारेजण ||
खळ्यामध्ये बैल | करिती रवंथ | बसुनी निवांत | झाडाखाली ||
गडीमाणसेही | खावया भाकरी | गेली त्यांच्या घरी | नुकतीच ||
दळ्णकांडणी | पडलासे खंड | सारे काही थंड | अंगणात ||
चिमण्याही गेल्या | आपुल्या खोप्यात | राघू पिंजर्यात | विसावला ||
मंदसा तेवतो | देव्हार्यात दीप | म्हातारीचा जप | चालू असे ||
पाणी द्यावयाचे | करून निमित्त | नार गेली आत | खोलीमध्ये ||
आयन्यात बाई | पाहे पुन्हा पुन्हा | गालावरी खुणा | रात्रीच्या त्या ||
आठवता सारे | दूर झाली लाज | चमकली वीज | देहामध्ये ||
प्रीतिच्या नागाने | मारलासे डंख | वासनेचे पंख | आभाळात ||
तारूण्याची बाग | बीजही सुपीक | चुंबनांचे पीक | भरघोस ||
सोडता ना सुटे | कंचुकीची गाठ | अवघडे पाठ | ऐनवेळी ||
इतुक्यात आली | दारावरी थाप | उडे थरकाप | लागोलाग ||
सावरुनी केस | घेतला पदर | पुसला अधर | तळहाती ||
सुंठ मागायला | वंस आल्या दारी | खोकते म्हातारी | ढसांढसां ||
सुरू होण्याआधी | संपलासे खेळ | कशी आली वेळ | बाईवरी ?||
"नको बाई होऊ | अशी तू उदास"| सल्ला देई खास | सखी तिला ||
"रातच्याला जाग | 'त्यांना'ही जागव | हौस तू भागव | सारी तुझी "||
बाई ती बिच्चारी | करितसे धावा | "आज तरी देवा | पाळी नको "||
आपला,
(छंदबध्द) धोंडोपंत
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प्रतिक्रिया
44
क्या बात है धोंड्या!
In reply to क्या बात है धोंड्या! by विसोबा खेचर
तात्या ह्य
अरे वा
खूपच आवडली
In reply to खूपच आवडली by सर्किट (verified= न पडताळणी केलेला)
तजुर्बेकार
चित्रमय
वा!
विनोदी
एक नंबर
छान... कविता
कविता आवडली.
आयन्यात
धन्यवाद
वा सुंदर
श्री. प्रकाशराव
छान
कवितेचे उत्तर
मजा आली
धोंडोपंत, अभिनंदन!!
In reply to धोंडोपंत, अभिनंदन!! by पिवळा डांबिस
वा! :)
धोंडोपंत,न
छप्परफाड....
वाह वा
बढीया
प्रवेश.
सुरेखच !
काय की ब्वा?
'हुक' चा श्लेष !
या कवितेवर
In reply to या कवितेवर by आपला अभिजित
उगाच वेड
वाह वाह
सुंदर!!!!!
व्वा
In reply to व्वा by अनिरुध्द
सर्वांना
खत्तरनाक
In reply to खत्तरनाक by प्यार इश्क मौहब्बत
धन्यवाद
वा वा
In reply to वा वा by प्रवासी
पंत पंत
पन्तोजी
नाद खुळा
कविता झकासच!
लय भारी
हैन!!!!!! चित्र तं मस्तच उभं
जबरा !