मराठी साहित्य, संस्कृती आणि लेखनाचे व्यासपीठ

|| गणरायाची प्रार्थना ||

राघव · · लेखमाला

|| गणरायाची प्रार्थना ||


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"संतांची सरळ साधी शिकवण समजून घ्यावी आणि त्यानुसार आचरण असावे हीच इच्छा. त्या तळमळीतून सुचलेल्या या ओळी."



उत्सवाची शिळा| आली डोक्यावर| दगडांचा भार| माथी बसे|| कुणाला गणेश| कुणा अर्धनर| शापित संकर| प्राणिमात्रे || ऐकोनी भीषण| तत्त्वांचे चिंतन| बावळट ध्यान| माझे दिसे|| वेद शास्त्र चर्चा| पुराणांची गाथा| समजो न येता| खोटे कसे|| नको ऐकणे ते| [अर्ध] हळकुंडांचे सार| नसता अधिकार| बुद्धिभेद|| उत्तम गवई| राग साधे जरी| रोग साधे तरी| वैद्यराज|| ज्याचा अधिकार| त्यास त्याचा भार| श्रद्धेचा आचार| सांभाळावा|| दुधातून दही| दह्यातून लोणी| घुसळावी गोणी| अंती सार || तुझातच आहे | ब्रह्मतत्त्व जरी| साधनेची रवी| फिरवावी|| संत सांगताती| शास्त्रांची उकल| सद्विचारे बल| वृत्ती साधे|| ऐकावे वाचावे| मनी आचरावे| मन आवरावे| नाम घेता|| कायावाचामने| रुजो सद्विचार| तैसाची आचार| असो द्यावा|| अजाण बालक| प्रार्थितसे भावे| करवोनी घ्यावे| गणराया||

प्रचि श्रेयनिर्देश: आंतरजालावरून साभार, प्रताधिकारमुक्त.


वाचने 17208 वाचनखूण प्रतिक्रिया 11

यशोधरा गुरुवार, 09/12/2019 - 08:14
सुरेख लिहिले आहेस, राघव.
संत सांगताती| शास्त्रांची उकल| सद्विचारे बल| वृत्ती साधे|| ऐकावे वाचावे| मनी आचरावे| मन आवरावे| नाम घेता|| कायावाचामने| रुजो सद्विचार| तैसाची आचार| असो द्यावा||
सुरेख.

मदनबाण Sun, 09/15/2019 - 17:54
दासांचेही दास | व्हावे आपण | घालावे लोटांगण | चरणावरी | कसालाही नसावा | मोह मद मत्सर | सतत असावे | मुखी तुझे नाम | मागतो मी दान | तुजला गणनाथा | कधी न पडावा | विसर मजलागी | प्रार्थीतो तुजला | हे स्वानंद नाथा | सुबुध्दी मिळावी | तुझीया कॄपेने |

मदनबाण.....

आजची स्वाक्षरी :- मेरा दिल तेरे लिये धड़कता है... :- Aashiqui