मराठी साहित्य, संस्कृती आणि लेखनाचे व्यासपीठ

मला आलेले एक स्वारस्यपूर्ण अग्रप्रेषित (Forward)

शरुबाबा · · जे न देखे रवी...
सभी बेवडों को समर्पीत... बेवडे जमीन पर

मै कभी बतलाता नहीं
बार मे जात हूं मै मा...
युं तो मै दिखलाता नहीं
दारू पीकर रोज़ आता हूं मै मा....
तुझे सब है पता, है ना मा...
तुझे सब है पात, मेरी मा...

ठेके पे युं ना छोडो मुझे,
घर लौट के भी आ ना पाऊं मै मा...
पौआ लेने भेज ना इतना दूर मुझको तू,
घर भी भूल जाउं मै मा...

क्य इतना बूरा हूं मै मा...
क्य इतना बूरा...मेरी मा..

दारू मै इतना पीता नहीं,
पर मै सहम जाता हूं मा...
चेहरे पे आने देता नहीं
लेकिन मै लुडक जात हूं मा...

तुझे सब है पता... है ना मा...

तुझे सब है पता, मेरी मा...


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