मराठी साहित्य, संस्कृती आणि लेखनाचे व्यासपीठ

शायरी ...

चिनार · · जे न देखे रवी...
लेखनविषय:
१. तेरे जाने का असर कुछ ऐसा हुआ मुझपे , के तुझे धून्डते धून्डते मैने खुदको खो दिया ! और जब खुदको धून्डने निकला, , तो हर जगह सिर्फ तेरा चेहरा नजर आया ! ! २. तेरी आखो में खोकर कई ख्वाब देख लीये मैने , तेरी सांसो में मिलकर एक जिंदगी जी ली मैने , अब ना तेरी आखे है , ना तेरी सांसे है, , ना कोई ख्वाब है ,, बस्स एक जिंदगी है…. जो पिछा नही छोडती ! ! ३.तेरा ना मिलना तनहाई से क्या कम था , के अब जीने से मै घबराऊ ? तनहा जिंदगी नरक से क्या कम थी , के अब मरने से मै घबराऊ ??

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