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तृप्ती

लेखक अमोल केळकर यांनी शुक्रवार, 18/07/2008 09:46 या दिवशी प्रकाशित केले.

आमची प्रेरणा गोडवा , जोगवा आणी सोडवा
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तृप्ती
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घरी पण असेच राहू, काव काव नको करु !
कामावरच टेन्शन जरा, खाली उतरवून ठेवू !!

उद्याच्या करड्या दुनियेत, जलद झेप घेऊ !
नाती पैसा सांभाळत, जीवनाचे ध्येय गाठू !!

चल पुन्हा एकदा, जेवण बाहेर घेऊ !
व्हेज नॉन्वेज हॉटेलात, तृप्ती शोधत राहू !!
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गुरुने दिला ज्ञानरुपी वसा, आम्ही चालवू हा पुढे वारसा !!

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