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तृप्ती

अमोल केळकर · · जे न देखे रवी...
लेखनविषय:
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आमची प्रेरणा गोडवा , जोगवा आणी सोडवा ---------------------------------------------------------------------- तृप्ती . घरी पण असेच राहू, काव काव नको करु ! कामावरच टेन्शन जरा, खाली उतरवून ठेवू !! उद्याच्या करड्या दुनियेत, जलद झेप घेऊ ! नाती पैसा सांभाळत, जीवनाचे ध्येय गाठू !! चल पुन्हा एकदा, जेवण बाहेर घेऊ ! व्हेज नॉन्वेज हॉटेलात, तृप्ती शोधत राहू !! ------------------------------------------------------------------------- गुरुने दिला ज्ञानरुपी वसा, आम्ही चालवू हा पुढे वारसा !!

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