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सारे जहाँसे

लेखक तिमा यांनी शुक्रवार, 04/03/2016 09:36 या दिवशी प्रकाशित केले.
देशद्रोह्यांचे राष्ट्रवादी(?) गीत सारे जहाँसे अच्छी इशरत जहाँ हमारी असलियत छुपाके उसकी, हम जीतेंगे ये बारी आये कहाँसे शातीर*, ले गये जागीर हमारी तडपते रहे है तबसे, वो याद आयी प्यारी मजहब नही सिखाता आतंकीसे बैर रखना ये काफिरोंकी साजिश ,वो कत्ले-आम करना वो दर्द है के हस्ति, मिटती नही जो उसकी सदियों रहा है दुश्मन, तख्ता पलट्के आया *शातीर - धूर्त, कावेबाज
काव्यरस
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हं...