| काव्य |
वात्रटिका- अभियान स्वच्छता |
विवेकपटाईत |
| काव्य |
अजुनी बसून आहे |
विदेश |
| काव्य |
( ओळखलत का साहेब मला?) |
अमोल केळकर |
| काव्य |
एक उदास कंटाळवाना चेहरा |
प्रकाश१११ |
| काव्य |
दर्शनता! |
अत्रुप्त आत्मा |
| काव्य |
बरळप्रहरी.. |
गवि |
| काव्य |
शब्द |
पाषाणभेद |
| काव्य |
चांदणी |
सुर्या गार्डी |
| काव्य |
(दोन दिवस मुंबईत गेले,दोन दिल्लीत गेले) |
अमोल केळकर |
| काव्य |
मिपाकरलक्षणे समास द्वितीय |
सस्नेह |
| काव्य |
आजोबा...!! |
प्रकाश१११ |
| काव्य |
गजरा |
सुर्या गार्डी |
| काव्य |
ताज्या क्षणिका – सत्तेचा आनंद, नागपुरी संत्रा आणि टोल |
विवेकपटाईत |
| काव्य |
तुझी सोबत....... |
माझं आभाळ |
| काव्य |
घेऊन जा |
सह्यमित्र |
| काव्य |
पंचप्राण |
चलत मुसाफिर |
| काव्य |
तसे देव मोकळेच असतात..!! |
प्रकाश१११ |
| काव्य |
दिवाळी - वैचारिक क्षणिका |
विवेकपटाईत |
| काव्य |
कारुण्य टंकन |
निराकार गाढव |
| काव्य |
दिवाळीच्या फुलझड्या |
विवेकपटाईत |
| काव्य |
शब्दांशी दोस्ती |
प्रकाश१११ |
| काव्य |
"आज म्हणलं माती व्हावं" |
वैभवकुमारन |
| काव्य |
लागली कुणाला कुणाची उचकी; ह्याला का त्याला ? लाजू नको, लाजू नको ! |
माहितगार |
| काव्य |
ज्याचे त्याला कळले |
वेल्लाभट |
| काव्य |
मांद्यपर्वातील भैरवी |
अवतार |
| काव्य |
प्रेमही जरुरीपुरतंच करावं... |
अजब |
| काव्य |
<दबंग> |
वेल्लाभट |
| काव्य |
विंचू चावला |
फुंटी |
| काव्य |
कोवळीक |
पाषाणभेद |
| काव्य |
<पतंग> |
राजेश घासकडवी |