मराठी साहित्य, संस्कृती आणि लेखनाचे व्यासपीठ

जन्नत-ए-कलेजा

सद्दाम हुसैन · · पाककृती
उई उई उई उई! आज अम आप्को एक नया वाला कुछ बताईंगा उई ! वैसे तु तुम्ही लोक ने बघा हूइंगा की सगळ्यात छोटा वाला पाककृती ओ म्यागी का वच्चा बी २ मिनीट लेता है उई ... लेकिन अमारा पाककृती तो १ मिनीट बी नै लेता ऊई ... और ना उसमे कुछ डोक्याला शॉट है आणि १० प्रकार के साहित्य की जरुरत है उई .. चलो अब्बी टाइमपास बहुत हो गया उई , अब्बी तक तो ये जन्नत-ए-कलेजा बन भी गया होता उई .. क्या क्या लगिंगा ? कुछ नही उई थोडा ( बोले तो जितना तुम चाहि उतना उई ) बकरे का कलेजा ( वैसे तो मुर्गेका भी ले सकता है उई ) पर बकरेका कलेजा बहोत स्वादिश्ट होता है उई .. और टाइमपास के लिये नमक .. बस्स .. कैसा करिंगा ? एक स्टेप पाककृती है .. आप मट्टन / चिक्कन तो लेके आता हि है , खाटिक मियाँ को थोडा झादा कलिजा मांग के लेनेका . घर लाके कलेजा शेप्रेट करने का .. अगर आप साफ सुथरा खाना पसन्द करती है तो मस्त धोने का , और सिधा एक सलिया घुसा के ग्यास के धिमे आंच पे रखने का ऊइ ... और रोल करते करते थोडा थोडा मिठ डालने का उई .. जास्तित जास्त एक मिनिट उई ... हो गया आप का "जन्नत-ए-कलेजा" तय्यार. भोत सारा लोहा का बच्चा होता है इसमे उई... ये डिश आप को कोनत्यापण हाटिल मे नही मिलेंगा उई .. अगर आप दारु पिता है तो चखना के जैसा इस्कु का सकता है उई .. घर मे बच्चा कम्पनी काने के मामला मे कैसा उतावळा होता है ये मै क्या सांगु उई ? तो उन्को काना तय्यार होण्या आधी ये दे देने का उई .. बच्च्चा बी कुश और आप बी ! चलो आपल्या रैवार की सोय तो हो गई उई ... तुम्ही पण तुमच्या रैवारला जन्नत बनवा.

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