< < < < मजबूरी हय > > > >
लेखनविषय:
काव्यरस
- Read more about < < < < मजबूरी हय > > > >
- 11 प्रतिक्रिया
- Log in or register to post comments
मिकादा, पैजारबुवा, अभ्यादादा आऊर रातराणीतै के पिच्चे पिच्चे मै भी कस्काय चल पड्या कायच म्हैती नाही. पन मेरा भी जळके करपा मस्सालाभात हुवा इस्लीये मयनेभी हिन्दिक्की चिंदी करनेका ठाणच डाल्या. मंग काय...एक आय अपने पोरट्याको कयसे धोपातटी हय वैच्च चित्र कविता मे उतारके इद्दर डालरा हू!