या भागात आपण दुरंगी, तिरंगी किंवा चतुरंगी लढती होत असलेल्या राज्यांमध्ये बऱ्यापैकी (किमान २०%) जागा मिळविण्यासाठी किती टक्के मते लागतात हे बघू. कोणत्या परिस्थितीत एखाद्या राज्यात दुरंगी/तिरंगी किंवा चतुरंगी लढत आहे असे मी म्हणतो हे लेखामध्ये स्पष्ट होईलच.
दुरंगी लढतीमध्ये मी खालील दोन परिस्थितींचा अंतर्भाव करत आहे. एखाद्या राज्यात दोन मुख्य पक्ष/आघाडी यांना एकूण ९०% च्या आसपास मते मिळत असतील तर त्या राज्यांमध्ये मी ’थेट दुरंगी’ लढत आहे असे म्हणतो (उदा. १९८९,१९९१,१९९६ आणि २००९ मध्ये केरळ,१९८९ आणि १९९६ मध्ये पश्चिम बंगाल, १९९८ चा अपवाद वगळता गुजरात). समजा एखाद्या राज्यात दोन प्रमुख पक्ष/आघाडी यांना साधारण ८५% पेक्षा जास्त मते मिळाली आहेत आणि अनेकदा तिसरा पक्ष/आघाडी किमान ६-८% मते मिळवत असेल तर त्या राज्यात ’प्रामुख्याने दुरंगी लढत’ आहे असे मी म्हणतो.
थेट दुरंगी लढत
केरळमध्ये २००४ चा अपवाद वगळता १९८९ पासूनच्या प्रत्येक निवडणुकीत दोन प्रमुख आघाड्यांना (कॉंग्रेस आणि डावी आघाडी) किमान ९०% मते मिळाली आहेत. खाली दिलेल्या तक्त्यात राज्यात विविध लोकसभा निवडणुकांमध्ये मिळालेली मतांची टक्केवारी आणि लोकसभा निवडणुकांमध्ये मिळालेल्या जागा दिल्या आहेत.
तक्ता क्रमांक १
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| केरळ | १९८९ | | १९९१ | | १९९६ | | १९९८ | | १९९९ | | २००४ | | २००९ | |
| | मते % | जागा | मते % | जागा | मते % | जागा | मते % | जागा | मते % | जागा | मते % | जागा | मते % | जागा |
| डावी आघाडी | ४३.२% | ३ | ४४.७% | ४ | ४५.०% | १० | ४४.६% | ९ | ४३.७% | ९ | ४६.१% | १८ | ४१.९% | ४ |
| कॉंग्रेस आघाडी | ४९.३% | १७ | ४९.३% | १६ | ४५.७% | १० | ४६.१% | ११ | ४६.९% | ११ | ३८.४% | १ | ४७.७% | १६ |
| भाजप आघाडी | ४.५% | ० | ४.६% | ० | ५.६% | ० | ८.०% | ० | ७.९% | ० | १२.१% | १ | ६.३% | ० |
| इतर | ३.०% | ० | १.५% | ० | ३.७% | ० | १.३% | ० | १.५% | ० | ३.४% | ० | ४.१% | ० |
| एकूण | १००.०% | २० | १००.०% | २० | १००.०% | २० | १००.०% | २० | १००.०% | २० | १००.०% | २० | १००.०% | २० |
तसेच पश्चिम बंगालमध्ये १९८९ आणि १९९६ च्या निवडणुकांमध्ये थेट दुरंगी सामना झाला होता (दोन प्रमुख आघाड्यांना जवळपास ९०% मते). तक्ता क्रमांक २ मध्ये या निवडणुकांमध्ये विविध पक्षांना मिळालेली मतांची टक्केवारी आणि मिळालेल्या जागा दिल्या आहेत.
तक्ता क्रमांक २
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| पश्चिम बंगाल | १९८९ | | १९९६ | |
| | मते % | जागा | मते % | जागा |
| डावी आघाडी | ५१.४% | ३७ | ४९.१% | ३३ |
| कॉंग्रेस आघाडी | ४२.८% | ५ | ४०.१% | ९ |
| भाजप आघाडी | १.७% | ० | ६.९% | ० |
| इतर | ४.१% | ० | ४.०% | ० |
| एकूण | १००.०% | ४२ | १००.०% | ४२ |
या दोन तक्त्यांवरून आपल्या एक गोष्ट ध्यानात येते:
१. थेट दुरंगी लढतीत दोन पक्षांना साधारण सारखीच मते मिळत असतील (किंवा मतांमधील फरक फार नसेल--उदाहरणार्थ केरळ १९९६ आणि १९९८) तर दोन पक्षांना साधारण सारख्याच जागा मिळतात.
२. थेट दुरंगी लढतीत दोन पक्षांमधील मतांचा फरक ५% पेक्षा जास्त असेल तर अधिक मते मिळविणारा पक्ष जोरदार विजय मिळवतो तर कमी मते मिळविणाऱ्या पक्षाला थोड्या जागांवर समाधान मानावे लागते. पश्चिम बंगालमध्ये इतकी वर्षे डावी आघाडी मोठ्या प्रमाणावर जागा मिळवत होती. कॉंग्रेस आणि डाव्या आघाडीच्या मतांमध्ये फरक ८-९% असायचा पण लोकसभा निवडणुकांमध्ये डाव्या आघाडीला कॉंग्रेसपेक्षा ५-६ पटींनी जास्त जागा मिळत असत.विधानसभा निवडणुकांमध्ये हा फरक अधिक pronounced असायचा.
तेव्हा थेट दुरंगी लढत असलेल्या राज्यात ४०-४१% मते मिळाली तर त्याचा फार उपयोग नाही.पण जशी मतांची टक्केवारी ४५% च्या पुढे वाढते तशी जागांची संख्या व्यस्त प्रमाणात वाढत जाते.
मुख्यत्वे दुरंगी लढत
राजस्थानात १९८९ ते २००९ या काळातही मुख्यत्वे दुरंगी सामने झाले होते. १९८९ मध्ये भाजप-जनता दल युती (तक्त्यात भाजपमध्ये मते आणि जागा धरल्या आहेत) तर १९९१ ते २००९ या काळात भाजप विरूध्द कॉंग्रेस असा दुरंगी सामना होता. राजस्थानात इतरांना मिळालेली मते केरळ आणि पश्चिम बंगालपेक्षा जास्त आहेत.पण ही मते मुख्यत्वे अपक्ष आणि लहान पक्षांमध्ये विखुरलेली आहेत.त्यामुळे राजस्थानातही दुरंगी सामना होता असे म्हणायला हरकत नसावी. खालील तक्त्यात राजस्थानात विविध पक्षांना मिळालेली मते आणि जागा दिल्या आहेत.
तक्ता क्रमांक ३
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| राजस्थान | १९८९ | | १९९१ | | १९९६ | | १९९८ | | १९९९ | | २००४ | | २००९ | |
| | मते % | जागा | मते % | जागा | मते % | जागा | मते % | जागा | मते % | जागा | मते % | जागा | मते % | जागा |
| भाजप | ५५.३% | २५ | ४०.९% | १२ | ४२.४% | १२ | ४१.७% | ५ | ४७.२% | १६ | ४९.०% | २१ | ३६.६% | ४ |
| कॉंग्रेस | ३७.०% | ० | ४४.०% | १३ | ४०.५% | १२ | ४४.५% | १८ | ४५.१% | ९ | ४१.५% | ४ | ४७.२% | २० |
| इतर | ७.७% | ० | १५.१% | | १७.१% | १ | १३.८% | २ | ७.७% | ० | ९.५% | ० | १६.२% | १ |
| एकूण | १००.०% | २५ | १००.०% | २५ | १००.०% | २५ | १००.०% | २५ | १००.०% | २५ | १००.०% | २५ | १००.०% | २५ |
मध्य प्रदेशात १९८९ ते २००९ या काळात (१९९६ चा अपवाद वगळता) मुख्यत्वे दुरंगी सामने झाले होते. तक्ता क्रमांक ४ मध्ये मध्य प्रदेशातील आकडेवारी दिली आहे.
तक्ता क्रमांक ४
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| मध्य प्रदेश | १९८९ | | १९९१ | | १९९८ | | १९९९ | | २००४ | | २००९ | |
| | मते % | जागा | मते % | जागा | मते % | जागा | मते % | जागा | मते % | जागा | मते % | जागा |
| भाजप | ४८.०% | ३१ | ४१.९% | १२ | ४५.७% | ३० | ४६.६% | २९ | ४८.१% | २५ | ४३.४% | १६ |
| कॉंग्रेस | ३७.७% | ८ | ४५.३% | २७ | ३९.४% | १० | ४३.९% | ११ | ३४.१% | ४ | ४०.१% | १२ |
| बसपा | ४.३% | | ३.५% | १ | ८.७% | ० | ५.२% | ० | ४.८% | ० | ५.९% | १ |
| इतर | १०.०% | १ | ९.३% | | ६.२% | ० | ४.३% | ० | १३.०% | ० | १०.६% | ० |
| एकूण | १००.०% | ४० | १००.०% | ४० | १००.०% | ४० | १००.०% | ४० | १००.०% | २९ | १००.०% | २९ |
यावरून असे कळते की मुख्यत्वे दुरंगी सामने असलेल्या राज्यांमध्येही थेट दुरंगी लढतीप्रमाणेच:
१. दोन पक्षांना मिळालेल्या मतांमध्ये फार फरक नसेल तर जागांमध्येही फार फरक नसतो.
२. पण दोन पक्षांना मिळालेल्या मतांमध्ये ५% पेक्षा जास्त फरक असेल तर मात्र जास्त मते मिळालेला पक्ष बऱ्याच प्रमाणात अधिक जागा जिंकतो.
फरक इतकाच की थेट दुरंगी लढतील जो फायदा ४८-४९% मते मिळून होतो तोच फायदा मुख्यत्वे दुरंगी लढतीत ४२-४३% पर्यंत मते मिळाली तरी बघायला मिळतो.अशा मुख्यत्वे दुरंगी लढतील कुठल्या पक्षाला ४७-४८% मते मिळाली तर तो पक्ष मात्र खूपच मोठा विजय मिळवतो (मध्य प्रदेश-२००४)
तिरंगी लढत
समजा एखाद्या राज्यात दोन मोठ्या पक्षांना/आघाड्यांनंतर तिसऱ्या पक्षाला/आघाडीला किमान १०-१५% मते आणि उरलेली मते अपक्ष आणि इतर लहान पक्षांमध्ये विखुरली जाणे याला तिरंगी लढत म्हणता येईल.
पुढील तक्त्यात पश्चिम बंगालमध्ये १९९१,१९९८,१९९९ आणि २००४ मध्ये मिळालेली मते आणि जागा दिल्या आहेत.
तक्ता क्रमांक ५
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| पश्चिम बंगाल | १९९१ | | १९९८ | | १९९९ | | २००४ | |
| | मते % | जागा | मते % | जागा | मते % | जागा | मते % | जागा |
| डावी आघाडी | ४८.१% | ३७ | ४६.८% | ३३ | ४६.७% | २९ | ५०.७% | ३५ |
| कॉंग्रेस आघाडी | ३६.२% | ५ | १६.४% | १ | १३.३% | ३ | १५.३% | ६ |
| भाजप आघाडी | ११.७% | ० | ३४.६% | ८ | ३७.९% | १० | २९.१% | १ |
| इतर | ४.०% | ० | २.२% | ० | २.०% | | ४.८% | |
| एकूण | १००.०% | ४२ | १००.०% | ४२ | १००.०% | ४२ | १००.०% | ४२ |
महाराष्ट्रात १९९९ मध्ये सेना-भाजप युती, कॉंग्रेस आणि राष्ट्रवादी अशी तिरंगी लढत झाली होती.त्या निवडणुकांमधील आकडे खाली दिले आहेत.
तक्ता क्रमांक ६
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| महाराष्ट्र | १९९९ | |
| | मते % | जागा |
| भाजप-सेना | ३८.१% | २८ |
| कॉंग्रेस | २९.७% | १० |
| राष्ट्रवादी | २४.६% | ८ |
| इतर | ७.६% | २ |
| एकूण | १००.०% | ४८ |
ओरिसामध्ये २००९ मध्ये बिजू जनता दल, कॉंग्रेस आणि भाजप यांच्यात तिरंगी लढत झाली होती. त्या राज्यातील आकडेवारी खाली दिलेल्या तक्त्यात दिली आहे.
तक्ता क्रमांक ७
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| ओरिसा | २००९ | |
| | मते % | जागा |
| बिजद | ३७.२% | १५ |
| कॉंग्रेस | ३२.७% | ६ |
| भाजप | १६.९% | ० |
| इतर | १३.२% | ० |
| एकूण | १००.०% | २१ |
तिरंगी लढत असते त्या राज्यांमध्ये पुढील गोष्टी बघायला मिळतात:
पहिल्या क्रमांकाची मते मिळविलेल्या पक्षाला निश्चितपणे मतांच्या तुलनेत व्यस्त प्रमाणात जास्त जागा मिळतात. तर दुसऱ्या क्रमांकाची मते मिळविलेल्या पक्षाला मतांच्या तुलनेत व्यस्त प्रमाणात कमी जागा मिळतात. दुसऱ्या आणि तिसऱ्या क्रमांकाच्या पक्षांमध्ये मतविभागणी झाल्याचा बराच फायदा पहिल्या क्रमांकाच्या पक्षाला होतो. तिसऱ्या पक्षाला मात्र स्वत:चा ठसा उमटविण्यासाठी बराच मोठा पल्ला गाठावा लागतो. ओरिसात २००९ मध्ये भाजपला जवळपास १७% मते मिळाली तरी एकही जागा मिळाली नाही. स्वत:चा ठसा उमटवायला या तिसऱ्या क्रमांकाच्या पक्षाला किमात ६-८% अधिक मते मिळवावी लागतील.
चतुरंगी लढत
उत्तर प्रदेशात १९९१ पासून चतुरंगी लढती होत आहेत.
तक्ता क्रमांक ८
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| उत्तर प्रदेश | १९८९ | | १९९१ | | १९९६ | | १९९८ | | १९९९ | | २००४ | | २००९ | |
| | मते % | जागा | मते % | जागा | मते % | जागा | मते % | जागा | मते % | जागा | मते % | जागा | मते % | जागा |
| भाजप | ८.२% | ९ | ३२.८% | ५२ | ३४.४% | ५३ | ३८.०% | ६० | २९.१% | ३१ | २३.०% | ११ | २०.८% | १५ |
| कॉंग्रेस | ३१.८% | १५ | १८.०% | ५ | ८.१% | ५ | ६.०% | ० | १७.२% | १२ | १२.०% | ९ | १८.३% | २१ |
| जनता दल | ३७.७% | ५८ | २१.३% | २२ | | | | | | | | | | |
| जनता दल (स)/सपा | | | १०.५% | ४ | २६.१% | १८ | २८.७% | २० | २४.१% | २६ | ३१.२% | ३८ | २३.३% | २३ |
| बसपा | ९.९% | २ | ८.७% | १ | २०.६% | ६ | २०.९% | ४ | २२.१% | १४ | २४.७% | १९ | २७.४% | २० |
| इतर | १२.४% | २ | ८.७% | १ | ११.८% | ३ | ६.४% | १ | ७.५% | २ | १४.४% | ३ | १०.२% | १ |
| एकूण | १००.०% | ८५ | १००.०% | ८५ | १००.०% | ८५ | १००.०% | ८५ | १००.०% | ८५ | १००.०% | ८० | १००.०% | ८० |
चतुरंगी लढती खूपच इंटरेस्टिंग असतात. या लढतीतून आपल्याला पुढील गोष्टी समजतील:
१. एखाद्या पक्षाची मते किती विखुरलेली आहेत आणि किती एकत्र आहेत हा प्रश्न कोणत्याही निवडणुकीत महत्वाचा असतोच.पण चतुरंगी लढतीत हा प्रश्न अधिक महत्वाचा असतो.बसपाला मते विखुरली गेल्यामुळे मतांच्या तुलनेत जागा मिळत नाहीत असे दिसून येईल.
२. चतुरंगी लढतीत ३०% पेक्षा जास्त मिळालेली प्रत्येक % जास्त मते मतांच्या तुलनेत व्यस्त प्रमाणात बऱ्याच जास्त जागा मिळवून देतात. त्याउलट एखादा पक्ष २०% मतांमध्ये अडकला तर तितक्या प्रमाणावर जागा मिळत नाहीत.
आता पुढच्या भागापासून या आकडेवारीची आणि अनुमानांची पार्श्वभूमी लक्षात घेऊन विविध राज्यांमध्ये काय परिस्थिती असेल याविषयीचा माझा अंदाज लिहेन.