प्रिय वाचक,
'भारतकुमार'चे हे डावीकडे लिहिलेले गाणे तेंव्हाही मला पटायचे नाहीच. पण सध्याच्या परिस्थितीत तर ते मला बोचते.
मूळ गाणे हिंदीमधे असल्यामुळे विडंबन पण हिंदीतच केले आहे. विडंबन उभे वाचावे. तुलनेसाठी मूळ गीत डावीकडे दिले आहे.संपादकांनी ते मराठी नाही म्हणून उडवायचे असेल तर उडवावे. परन्तु माझ्या वयाच्या लोकांच्या भावना, आपणापर्यंत पोचवायचा मी प्रयत्न केला आहे.
- तिरशिंगराव
है प्रीत जहाँ की रीत सदा -................ है घूंस जहाँ की रीत सदा
मैं गीत वहाँ के गाता हूँ ................. मैं गीत वहाँ के गाता हूँ
भारत का रहने वाला हूँ ................... भारत का रहनेवाला हूँ
भारत की बात सुनाता हूँ .................. भारत का हाल सुनाता हूँ
काले-गोरे का भेद नहीं ..................... काले गोरेका भेद नही
हर दिल से हमारा नाता है ................... हर नोटसे हमरा नाता है
कुछ और न आता हो हमको ............... कुछ और न आता हो हमको
हमें प्यार निभाना आता है ................... हमें पैसा गिनना आता है
जिसे मान चुकी सारी दुनिया ............... जिसे मान चुकी सारी दुनिया
मैं बात वोही दोहराता ................... उस बातपे मैं शरमिंदा हूँ
भारत का रहने वाला हूँ ...................... भारतका रहनेवाला हूँ
भारत की बात सुनाता हूँ ...................... मजबूरीसे सह लेता हूँ
जीते हो किसीने देश तो क्या ............... जीतेहो किसीने प्रदेश तो क्या
हमने तो दिलों को जीता है ................ हमने उनको भी माफ किया
जहाँ राम अभी तक है नर में ................ जहाँ रावण अभी भी है नरमें
नारी में अभी तक सीता है ................. नारीमें अभी तो 'चमेली' है
इतने पावन हैं लोग जहाँ .................. इतने है गिरेसे लोग यहाँ
मैं नित-नित शीश झुकाता हूँ ................ लानतसे शीश झुकाता हूँ
भारत का रहने वाला हूँ .................... भारत का रहनेवाला हूँ
भारत की बात सुनाता हूँ .................. भारतका हाल सुनाता हूँ
इतनी ममता नदियों को भी ................... ये अत्याचार नदियोंपर
जहाँ माता कहके बुलाते है .................. जिन्हे माता कहके बुलाते है
इतना आदर इन्सान तो क्या ................... इन्सानको लगती है ठोकर
पत्थर भी पूजे जातें है ....................... पर पत्थर पूजे जाते है
इस धरती पे मैंने जनम लिया ................. जिस धरतीपे मैने जनम लिया
ये सोच के मैं इतराता हूँ ................... उस माँके लिये मैं रोता हूँ
भारत का रहने वाला हूँ ..................... भारतका रहनेवाला हूँ
भारत की बात सुनाता हूँ .................... भारतका हाल सुनाता हूँ
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सुंदर
+१
शब्दा शब्दाशी सहमत.
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यतार्थ वर्णन
तिरशिंगराव माणूसघाणे ,हे आहे खर विडंबन ,मस्तच
शब्दाशब्दाशी सहमत...ही कविता
तर शब्दसामर्थ्याचे चीज होईल!